Wednesday, June 6, 2007

सुबह से शाम ...

कहते हैं सुबह लाती है दिन की नयी उमंग
लेकिन उनसे जुदाई बनाती है हमें एक कटी पतंग

इंतज़ार के हर पल में सुलगते हैं लाखों अरमां
शाम को उनके दीदार से ही जिन्दगी होती है फिर से जवां

2 comments:

MG said...
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MG said...

arz kiya hai...

Ye keh kar hum dil ko behla rahe hain...
Wo abb chal chuke hain, wo abb aa rahe hain...