दिल पूछता है बार - बार कहॉ गए वो पल
इस दुनिया की भाग - दौड़ मैं कहीँ खो गए वो पल
सुबह की ताज़गी मॆं रम जाते थे वो पल
सूरज की पहली किरण से सजते थे वो पल
दिन के हर पहर मॆं गुनगुनाते थे वो पल
कभी ग़ज़ल कभी नज़्म फरमाते थे वो पल
ज़हन मॆं कहकशों को जगाते थे वो पल
जिन्दगी के आधार को समझाते थे वो पल
जन्नत की हर वक़्त सैर करते थे वो पल
ज़मीन पर रहने की उम्मीद जगाते थे वो पल
कभी ना ख़त्म होने की क़सम खाते थे जो पल
क्या वक़्त के सामने सर झुका कर विदा हो गए वो पल?
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