मैं पल दो पल का शायर हूँ,
पल दो पल मेरी कहानी है,
पल दो पल मेरी हस्ती है,
पल दो पल मेरी जवानी हैं।
साहिर लुध्यानवी की यह नज़्म सुनकर मुझे यह ख़्याल आता है
मैं हर पल उनका कायल हूँ,
हर पल उनकी दीवानगी है,
हर पल उनकी शायरी है,
हर पल उनकी खुमारी है।
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