जिन्दगी की इस झील से ही झरने का अघाज़ है
पानी की इस स्थिरता में ही नयी उमंग का राज़ है।
- भुवन
हर झील के दायरे में सिमटी होती है एक नदी
अगर मिले ऊँचाई तो बह सकती है वो चाहे जहाँ रुख लेती
दायरों में रहना भी है सही
अगर दायरों से बंधना ना बने आगे बढ़ते पैरों में बेड़ी
समय बदलता है दायरे भी बदलते हैं
अगर बदलना नियम है तो क्यों ना बदलें हम उन पुराने विचारों को भी
हर दायरा कहता है यही की समझो मुझे और जानो अपने आप को
अगर है तुम्हें जिन्दगी से मुहब्बत तो लो अपने हाँथों में जिन्दगी की डोर अपनी।
- मानसी
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