सूरज की तपन शिखर तक चढ़ गयी
फूल और पत्तियां भी मुरझा गयीं
बेचैनी के आलम से घिर गए हम
मगर मुझे यकीं है मेरे हमदम
सावन फिर से आएगा
ख़ुशी की फुहार से नहलायेगा
हर तरफ मुहब्बत के रंग खिलेंगे
फिर से हरियाली में दिल झूम उठेंगे
मायूसी और इंतज़ार सब बह जायेंगे
नयी उमंग के तराने हम गुनगुनायेंगे
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