Wednesday, November 14, 2007

सावन फिर से आएगा

सूरज की तपन शिखर तक चढ़ गयी
फूल और पत्तियां भी मुरझा गयीं
बेचैनी के आलम से घिर गए हम
मगर मुझे यकीं है मेरे हमदम

सावन फिर से आएगा

ख़ुशी की फुहार से नहलायेगा

हर तरफ मुहब्बत के रंग खिलेंगे
फिर से हरियाली में दिल झूम उठेंगे
मायूसी और इंतज़ार सब बह जायेंगे
नयी उमंग के तराने हम गुनगुनायेंगे

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