Saturday, April 14, 2007

परदेस मे अकेला














हर तरफ लगा है इंसानों का मेला
क्यों हूँ मैं फ़िर भी महफिल मे अकेला

नहीं समझना मुझे यह व्यापार का झमेला
भेजा जिसने मुझे महबूब से दूर परदेस मे अकेला


1 comment:

MG said...

subhaan-allah!!!