Wednesday, November 14, 2007

इंसानों का अजूबा

कुदरत हंसती है इंसानों के इस अजूबे पर,
बेकद्र किया खुली आँख जिसको, बंद आँख उसी को ढूंढ़ते हैं ज़िंदगी।

No comments: